प्रेमचंद अग्रवाल ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा

उत्तराखंड के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा बजट सत्र के दौरान उनके एक विवादास्पद भाषण के कुछ हफ़्तों बाद आया है। इस भाषण में उन्होंने पहाड़ी लोगों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि राज्य सिर्फ पहाड़ियों के लिए नहीं है। विपक्ष ने भाजपा पर पहाड़ी निवासियों की उपेक्षा और अपमान करने का आरोप लगाया था। इसके बाद राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई थी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास पर अपना इस्तीफा सौंपा।

फरवरी में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट की एक टिप्पणी पर प्रेमचंद अग्रवाल ने गुस्से में प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य के लिए इसलिए संघर्ष नहीं किया था कि श्पहाड़ीश् और श्देसीश् के बीच भेदभाव किया जाए। अग्रवाल ने विपक्षी विधायकों के साथ बहस के दौरान एक आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया था। उनकी इस टिप्पणी से लोगों में, खासकर राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों में काफी गुस्सा था।

उत्तराखंडः 100 नगर निकायों के लिये मतदान प्रक्रिया पूर्ण, शनिवार को रिजल्ट

उत्तराखंड में 100 नगर निकायों के लिए 23 जनवरी को मतदान प्रक्रिया संपन्न हो गई। मतदान सुबह आठ बजे से शुरू हो गया और शाम पांच बजे तक चला। हालांकि, कुछ जगहों पर रात आठ बजे तक मतदान जारी रहा। इसके बाद 5405 प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटियों में बंद हो गया।

मतदान खत्म होने के बाद पोलिंग पार्टियों ने मतपेटियों को स्ट्रांग रूम में जमा कराया। अब निकाय चुनाव में मतगणना 25 जनवरी को होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से रात 10 बजे जारी अनंतिम आंकड़े के अनुसार, लगभग 66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 3.78 प्रतिशत कम है।

डूबते जहाज से कांग्रेस मे हलचल, भाजपा पर तोहमत लगा रहे कांग्रेस अध्यक्षः भाजपा


देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस मे भगदड़ की स्थिति है और अधिकांश नेता भाजपा का दामन थाम रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष इसके लिए कांग्रेस की कुनीति को जिम्मेदार मानने के बजाय सत्तारुढ दल के साथ पार्टनरशिप से जोड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसी का किसी भी दल को ज्वाइन करना उसका निजी विषय है और इसके लिए किसी को कारण नही बनाया जा सकता है। चौहान ने कहा कि किसी जांच की आशंका मे फंसे होने अथवा अन्य कारण होने का यह मतलब नही कि भाजपा की सदस्यता से वह जांच से बच जायेगा। कानून और जांच एजेंसियां तो अपना कार्य करती ही रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति कांग्रेस मे है तो वह उसे पाक साफ माने और भाजपा की सदस्यता लेते ही उसे आरोपों के घेरे मे ले यह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घबराई हुई है और उसके नेताओं के भाजपा ज्वाइन करने पर वह ऐसे आरोप लगाती रही है। भाजपा पाँचों सीटों पर बड़े अंतर की जीत के लिए जुटी है।

चौहान ने कांग्रेस के पौड़ी प्रत्याशी गणेश गोदियाल के द्वारा चंदा मांगने को राजनैतिक स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि वह मुंबई के स्थापित उद्योगपति रहे हैं और हाल ही मे इनकम टैक्स की ओर से उन्हे समन किया गया था। जनता के बीच वह खुद को साधन और संसाधनहीन दिखाने के लिए ऐसे प्रपंच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को उनके कथन पर भरोसा नही है। राज्य मे चल रही मोदी लहर से कांग्रेसी घबरा गए है और भाजपा प्रत्याशियों को लेकर दुष्प्रचार कर रहे है।

मौन सत्याग्रह पर कांग्रेस स्थिति करे स्पष्ट, राहुल का गुणगान या यूसीसी विरोध?

भाजपा ने कांग्रेस के प्रस्तावित गांधी स्मारक पर मौन सत्याग्रह पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे स्पष्ट करना चाहिए कि वह अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का गुणगान के लिए मौन सत्याग्रह कर रही है अथवा यूसीसी का विरोध कर रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस दुविधा की स्थिति मे है और विकास कार्यों के जरिये खुद को साबित कर रही भाजपा की उपलब्धियां पच नही रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भाजपा के निशाने पर नही, बल्कि जनता ने उन्हे माफ नही किया है। उन्होंने कहा कि विदेशों मे भारत की छवि को धक्का पहुंचाने की उनकी नाकाम कोशिश को पूरे देश और दुनिया ने देखा। देश मे लोकतंत्र को लेकर जब लोगों ने तवज्जो नही दी तो वह विदेश यात्रा पर निकल गए। कांग्रेस कभी सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये सैनिकों के मनोबल पर प्रहार करती रही तो कभी संविधान को लेकर अनाप शनाप कथन अथवा हर उस कार्य की अगुवाई करती रही है जो देश के खिलाफ हो। वहीं कांग्रेस नेताओं के बेतुके बोल जो कि देश कि अस्मिता पर चोट करती है। भट्ट ने कहा कि राहुल गांधी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी सविधान से ही मिली और उन्हे सजा भी संविधान के दायरे मे मिली है। उन्हें जो भी सजा मिली वह उनके और अदालत के बीच का विषय है, लेकिन सार्वजनिक जीवन मे संसदीय भाषा और आचरण जरूरी होता है और उनसे यह चूक बार बार होती रही है। कांग्रेस उनके प्रति सहानुभूति बटोरने की फिराक मे है, लेकिन इससे उसे कुछ हासिल नही होने वाला है। सनातनी आवरण और आडंबर से कुछ हासिल नही होने वाला, क्योंकि जनता सब जानती और समझती है।

एनआरसी बिल को लेकर भी कांग्रेस खलनायक की भूमिका मे रही है और अब समान नागरिक कानून को लेकर वह विरोध का वातावरण बना रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी को लेकर नही लायी, बल्कि यह भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा भी है। वैश्विक महंगाई और कोरोना की चुनौतियों के बावजूद देश की अर्थ व्यवस्था पर असर न पड़ना और 80 करोड़ जनता को मुफ्त राशन देना बड़ी उपलब्धि है। आज देश मे तरक्की और रोजगार के अवसर खुल रहे है तो विदेशों मे भारत की साख पहले की तुलना मे बढ़ी है। कांग्रेस को अपने नेता के गुणगान के बजाय बेहतर कार्याे को प्रोत्साहन और अपनी नाकामयाबियों से बचने के लिए दुसरो पर दोष मढ़ने से बचना चाहिए। खुद को पीड़ित दिखाना आज कांग्रेस मे एक दौर शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री ने किया भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्वे ऑडिटोरियम हाथीबडकला में प्रदेश भाजपा कार्य समिति की बैठक में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ सेवा ही हमारे संगठन का संकल्प रहा है और ये हमारी कार्यशैली व संस्कारों से प्रतिबिंबित भी होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशा निर्देशन में एक ओर जहां भारत राष्ट्रीय स्तर पर विकास की नई-नई ऊंचाईयों को छू रहा है, वहीं वैश्विक स्तर पर एक सशक्त, सामर्थ्यवान और आत्मनिर्भर देश के रूप में नई पहचान प्राप्त कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्वर्णिम कालखंड भारत की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक चेतना के पुनरोत्थान का कालखंड है और आज का नया भारत पुनः विश्वगुरु के स्थान पर आरूढ़ होने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज सनातन का जयघोष चारों दिशाओं में सुनाई दे रहा है। पूरे विश्व में सनातन सभ्यता का परचम लहरा रहा है और उसके ध्वजवाहकों व तीर्थों का सम्मान किया जा रहा है। आज हमारे पौराणिक मंदिरों और तीर्थ स्थानों का इतिहास और महत्व उसी गौरव के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है जिसके साथ इसे किया जाना चाहिए था। हमारे मंदिरों और देव स्थानों की उपेक्षा की गई, सनातन पद्धतियों का उपहास उड़ाया गया। आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अभूतपूर्व गति से भारत का सांस्कृतिक पुनरुत्थान हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की अस्मिता के प्रतीकों, हमारे ऋषियों और धर्म गुरुओं, हमारी सांस्कृतिक धार्मिक-धरोहरों को जिस प्रकार से संरक्षित व संवर्धित किया जा रहा है इसकी व्याख्या शब्दों में संभव नहीं है। यह कालखंड भारत की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक चेतना के उन्नयन की दृष्टि से स्वर्णिम कालखंड है। कोरोना महामारी के दौरान सम्पूर्ण विश्व ने इस उभरते हुए नए भारत की शक्ति को नजदीक से देखा और जाना। जब विदेशों को भारत द्वारा बनाई गई वैक्सीन प्रदान कर रहे थे, तो उन्हें दिए जाने वाली वैक्सीन के हर डिब्बे में लिखा रहता था ’’सर्वे संतु निरामयाः’’ अर्थात सभी निरोगी होएं। यही तो हमारी राष्ट्रनीति है, जहां ’’स्वः’’ के साथ-साथ ’’सर्व’’ के कल्याण की भी कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के गौरवमय मार्ग को प्रशस्त करने के लिए जिस ’’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास और सबका प्रयास’’ का मंत्र दिया है उसने देश की राजनीति की दिशा और दशा को बदलने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारंभ की गई गरीब कल्याण योजनाओं ने अंतिम पायदान पर खड़े हुए प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि देश में नोटबंदी लागू कर काले धन पर चोट करना हो, कश्मीर से धारा-370 हटाने जैसा ऐतिहासिक कार्य हो, देश में जीएसटी जैसा कानून लागू करना हो, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक कर उसके दांत खट्टे करना हो या कोरोना काल का दुर्भाग्यशाली लॉकडाउन हो, देश की जनता हमेशा प्रधानमंत्री जी के साथ खड़ी रही। देश में दशकों से गरीबी हटाओं के नारे तो खूब दिए गए लेकिन गरीबी हटाने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। आज जब हम पद्म सम्मानों की सूची देखते हैं तो उसमें कोई बड़े-बड़े सैलिब्रिटी नहीं बल्कि दूर दराज के क्षेत्रों में समाज के लिए काम करने वाले आम नागरिक होते हैं। चाहे देश की आजादी के अमृत महोत्सव पर हर घर तिरंगा यात्रा हो या दशमेश गुरू गोविंद सिंह साहब के चारों पुत्रों के बलिदान को ’’वीर बाल दिवस’’ के रूप में मनाने का कार्य हो, प्रधानमंत्री की महान सोच प्रत्येक कार्य में दृष्टिगोचर होती है। आज प्रधानमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में देश जहां विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, वहीं वैश्विक कूटनीति के मंच पर भी विश्व में भारत अग्रणी देशों में गिना जाता है, रूस और यूक्रेन युद्ध के समय हमारे द्वारा उठाए गए कदमों से यह बात परिलक्षित होती है। ’’अंत्योदय के साथ-साथ ’’सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’’ का मंत्र आज देश की मूल प्रेरणा बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ही वर्ष में तीन बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जी-20, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, शंघाई सहयोग संगठनों की अध्यक्षता मिलना बताता है कि भारत ने दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मनवा लिया है। यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि इस वर्ष जी-20 से संबंधित कुछ बैठकें हमारे प्रदेश में भी निर्धारित हैं, जिसमें से जी-20 की बैठक रामनगर में सकुशल संपन्न भी हो चुकी है। इस माह भी ऋषिकेश और नरेंद्रनगर में जी-20 की बैठकें होनी है, जिसके लिए युद्धस्तर पर कार्य चल रहे हैं। यह प्रधानमंत्री के नेतृत्व का ही कमाल है कि उत्तराखंड को भी जी-20 की मेजबानी करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आज केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से अंत्योदय की भावना को आत्मसात करते हुए ही हमारा प्रदेश भी सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने की दौड़ में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हमने उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने का जो ’’विकल्प रहित संकल्प’’ लिया है, उसके लिए हम निरंतर कार्यरत हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भ्रष्टाचार और भर्ती घोटालों पर किए गए प्रहार से लेकर समान नागरिक आचार संहिता, धर्मांतरण कानून, महिला आरक्षण, भू-कानून, देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाने और गरीबों को तीन निःशुल्क सिलेंडर देने और देवभूमि में बरसो से पनप रहे अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई जैसे कठिन मुद्दों पर हमारे द्वारा उठाए गए ’’ऐतिहासिक कदम’’ इस बात का प्रमाण हैं कि आज हमारी सरकार प्रदेश हित में ऐसे मुद्दों पर भी निर्णय लेने का कार्य कर रही है, जिन मुद्दों को वर्षों तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। यह डबल इंजन सरकार का ही प्रभाव है कि केन्द्र ने उत्तराखंड को मिलने वाले वार्षिक अनुदान को बढ़ाकर लगभग ग्यारह हजार करोड़ रूपये कर दिया। इस समय हमारे प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से लगभग सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाएं सफलता पूर्वक संचालित की जा रही हैं। पहले केवल योजनाएं बनाई जाती थी, परन्तु अब योजनाएं बनाई जाती हैं और उनको लागू भी किया जाता है। डबल इंजन की सरकार आने के बाद विकास का यही इंजन आज मैदान से लेकर पहाड़ तक सरपट दौड़ रहा है। हमने पहाड़ में रेल का सपना देखा था, वह सपना प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जल्द ही पूरा होने जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पूर्व देवभूमि में स्वास्थ्य सेवाएं स्वयं बीमार थी, लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज स्वास्थ्य सेवाओं का जिस तरह विस्तार हुआ है, वह विपक्ष के राज में संभव नहीं था। 2014 से पूर्व की सड़कों की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज देश में प्रतिदिन 38 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो रहा है। 2014 से पूर्व बच्चों को वैक्सीन लगवाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था, लेकिन मोदी के नेतृत्व में मिशन इन्द्रधनुष योजना के तहत बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व का एक अग्रणी राष्ट्र बन चुका है। 2014 के बाद देश में हर साल एक नए आईआईटी का निर्माण हुआ, एक नया आईआईएम बनाया गया। 2014 के बाद हर सप्ताह देश में एक यूनिवर्सिटी खोली गई। 2014 के बाद आज हर दिन देश में दो कॉलेज खोले गए हैं। हर दिन नई आईटीआई का निर्माण किया जा रहा है। यह सब बीते नौ वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड की पाँचों लोकसभा सीटों पर हमारे सांसद हैं, 2024 के चुनावों में हमारा संकल्प इन पाँचों सीटों पर विजय प्राप्त करना ही नहीं है बल्कि पिछले सारे रिकार्ड तोड़ते हुए एक नए इतिहास की रचना करना भी है। हमें 2024 के इस पुण्य अभियान में ठीक उसी तरह जुटना है जिस प्रकार भगवान श्रीराम के संकल्प की पूर्ति के लिए नल, नील, सुग्रीव, जामवंत, हनुमान व लक्ष्मण ही नहीं बल्कि एक छोटी सी गिलहरी भी पूर्ण समर्पण के साथ कार्य में जुटी हुई थी। 22 वर्ष का युवा उत्तराखंड अब एक नए जोश और एक नई उमंग के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमें बाबा केदार की धरती से प्रधानमंत्री जी द्वारा कहे गए कथन ’’21वीं सदी का तीसरा दशक, उत्तराखंड का दशक होगा’’ को चरितार्थ करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संकल्प लेना है।एक नई कार्य संस्कृति और सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि के मंत्र को लेकर हमारी सरकार प्रदेश में पूर्ण सुशासन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम सभी को पार्टी द्वारा निर्धारित सात सूत्रों का पालन करना आवश्यक है, वे सूत्र हैं सेवा भाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदना और संवाद। ये सात सूत्र जब हम सभी के जीवन से जुड़ेंगे, तभी हम समाज को, संगठन को और देश को आगे ले जाने का कार्य करने में सफल हो सकेंगे। हमने हमेशा संघर्ष किया है और ये संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े हुए गरीब व्यक्ति तक विकास की धारा न पहुंच जाए। जब तक भारतवर्ष पुनः सोने की चिड़िया न बन जाये, जब तक भारतवर्ष पुनः विश्वगुरु न बन जाये, तब तक हमें संघर्ष करते रहना पड़ेगा इस संघर्ष से घबराना नहीं है, संघर्ष को अपनाना है और संघर्ष करते हुए आगे बढ़ते जाना है।

कांग्रेस ने पूर्व सीएम एनडी तिवारी को भुलाया, तो धामी ने किया सम्मान

रुद्रपुर। राजनीति के पुरोधा रहे पं. नारायण दत्त तिवारी भले ही आज इस दुनिया में नही हैं। लेकिन आज भी उनके चाहने वाले या समर्थकों की कमी नही है। साल 2002 से 2007 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे तिवारी को कांग्रेस ने भुला दिया हो लेकिन उनके कामों को सम्मान देने का काम किया है सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने।

उत्तराखंड की सियासी पिच पर धुआंधार बैटिंग कर रहे पुष्कर सिंह धामी इस बात से भली भांति परिचित है कि राज्य में सिडकुलों की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसे किसी भी स्तर पर नकारा नहीं जा सकता है। इसके साथ ही धामी यह बात भी जानते है कि आज भी राज्य के बड़े स्तर पर पार्टी के इतर तिवारी समर्थकों का बड़ा वर्ग है। नैनीताल सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले तिवारी तराई क्षेत्र में भी खासा लोकप्रिय रहे हैं। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने राजनीतिक रुप से साहसिक फैसला लेते हुए पंतनगर सिडकुल को उनके नाम पर रखे जाने की घोषणा की थी।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के पद चिन्हों पर चलते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी उन पंक्तियों को भी चरितार्थ भी किया है जिसमें उन्होंने कहा था…….. सत्ताएं तो आती जाती रहेंगी ………..लेकिन व्यक्ति के कार्य और उसके साहसिक फैसले हमेशा याद रखे जायेंगे। जिन पंडित नारायण दत्त तिवारी को अब तक किसी भी सरकार ने सम्मान नही दिया और अपने नेता को भुला चुकी कांग्रेस गुटबाजी के भंवर में फंसी हुई है। ऐसे समय में सीएम धामी ने तराई में उनकी प्रतिमा का सिर्फ अनावरण ही नही किया बल्कि कार्यक्रम में ऐसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बुलाकर उनका सम्मान भी किया।

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लिये गये मुख्यमंत्री धामी के इस साहसिक फैसले की राज्य में ही नही राज्य से बाहर भी राजनीतिक गलियारों में खूब सराहना हुई। वहीं अपना और अपने नेता का सम्मान होते देख कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेसी नेता भावुक नजर आये और दिल खोलकर सीएम धामी की प्रशंसा की। यही नहीं नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिन्दाबाद के नारे लगाकर उपस्थित जनसमुदाय को अंचभित भी कर दिया। ऐसे मौके राज्य में कम ही देखने को मिले है कि विपक्षी नेता सत्तासीन नेताओं के जिंदाबाद के नारे लगाये। कांग्रेस नेता का यह वीडियो कुछ ही पलों में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो गया। जिस पर खूब सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। सोशल मीडिया यूर्जस ने सीएम धामी के नेतृत्व क्षमता और फैसले की खूब तारीफ की। निकाय और लोकसभा चुनाव से ऐन पहले लिए गये सीएम धामी के इस फैसले से उत्तराखंड कांग्रेस सकते में है।

राज्य की सियासत में कई मिथकों को तोड़ चुके सीएम धामी ने अपने फैसलों से सभी को अपनी मुरीद बनाया हुआ है। विपक्ष के विधायकों के साथ विकास कार्यों को लेकर बैठक हो या फिर बड़े नेताओं के साथ तमाम मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा। यही वजह है कि धामी का विरोध करने के बजाय कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत, प्रीतम सिंह, हरीश धामी भी समय-समय पर उनकी तारीफ करते हुए नजर आते हैं।

गणतंत्र दिवस पर राज्य को सर्वश्रेष्ठ बनाने का संकल्प दोहराया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधान निर्माताओं और राज्य आन्दोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान निर्माण का एक पर्व है। आज के दिन हमारे देश में बाबा साहेब अम्बेडकर के दिशा निर्देशन में बनाए गए संविधान को लागू किया गया था। हमारा यह विशिष्ट संविधान हमारे राष्ट्र का निरंतर मार्गदर्शन करता आ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे स्वाधीनता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान का स्मरण भी कराता है। यह अवसर हमें देशभक्तों के सपनों को साकार करने और अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध होने का संकल्प लेने की भी प्रेरणा देता है। संविधान के अंतर्गत ही हम सभी की जिम्मेदारी यह भी है कि हम न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूलभूत लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना को साकार करते हुए वर्ष 2025 तक देवभूमि उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, केंद्र सरकार के सहयोग एवं प्रदेश की 1.25 करोड़ जनता के आशीर्वाद से हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने में प्राण प्रण से जुटे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान निस्तारण और जन संतुष्टि के मूलमंत्र पर चलते हुए अंत्योदय की भावना के साथ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के विकास, कल्याण और उन्नति हेतु संकल्पबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जीरो टॉलरेंस आन करप्शन की नीति का अनुसरण कर प्रदेश में नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही कर रहे है। राज्य कैबिनेट द्वारा प्रदेश में भर्तियों में भ्रष्टाचार रोकने के लिये सख्त नकल विरोधी कानून बनाये जाने का निर्णय लिया गया है। इस कानून को इतना सख्त बनाया जायेगा कि भविष्य में कोई इस बारे में सोच भी न सके। सख्त नकल विरोधी कानून में दोषी का उम्र कैद की सजा का प्राविधान तो होगा ही उसके द्वारा अर्जित संपत्ति को जब्त किये जाने का भी व्यवस्था रहेगी।
भू-धंसाव से प्रभावित जोशीमठ की इस विपदा में हम प्रभावितों के साथ खड़े हैं। हम प्रभावितों के हित में उनकी जो भी अपेक्षाएं हैं उन अपेक्षाओं के अनुरूप उनके पुनर्वास और सेटलमेंट के लिए काम कर रहे हैं, प्रधानमंत्री जी भी स्वयं और उनका कार्यालय भी लगातार इस बात की चिंता कर रहा है। प्रभावितों के विस्थापन के लिए उनके सुझावों के आधार पर इतनी बेहतर व्यवस्था की जायेगी यह पूरे देश के लिए नजीर बने। उत्तराखण्ड एक आपदा संवेदनशील राज्य है। इसलिए हमारी जिम्मेदारियां भी अलग हैं। हम अपने सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का सर्वेक्षण करवा रहे हैं। हम हमेशा इकॉलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन की बात करते हैं। उत्तराखण्ड पर्यावरणीय सेवा प्रदाता राज्य है। हिमालय, वन एवं वन्य जीव सम्पदा हमारी अमूल्य धरोहर है। इनका संरक्षण एवं संवर्धन हमारा ध्येय है। स्थानीय लोगों का विकास व रिवर्स पलायन भी हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिना किसी तुष्टिकरण के सबका साथ सबका विश्वास और सबके प्रयास की भावना को साकार करने तथा धर्म, संस्कृति, आध्यात्म, शौय एवं सामरिक महत्व वाले गंगा के प्रदेश, देवभूमि उत्तराखण्ड के सभी संप्रदायों के हित में समान नागरिक संहिता कानून बनाये जाने के लिये कृत संकल्पित है। इसका हमने चुनाव से पूर्व जनता से भी वादा किया था। इसके साथ ही राज्य के कई क्षेत्रों में घटित हो रही धर्मांतरण की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने के लिये प्रदेश में सख्त धर्मांतरण कानून बनाया है। हमारे शांत प्रदेश में इस प्रकार की जबरन धर्मांतरण की घटनायें घटित न हों इसके लिये यह कानून लाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति का सम्मान भी हमारे लिये सर्वोपरि है। महिलाओं के कल्याण के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी योजनायें क्रियान्वित की जा रही हैं। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने का प्राविधान किया है। राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 2025 तक राज्य की 1.25 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश अमृत महोत्सव मना रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का नव भारत एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा आत्मनिर्भर भारत के महा अभियान में सहयोग का आह्वान किया।

हरदा की फेसबुक पोस्ट के क्या मायने, सीएम धामी में देख रहे बड़ी संभावना

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत गाहे बगाहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करते रहते हैं। आज उन्होंने जो फेसबुक पोस्ट की है, उसके मायने निकाले जाए तो हरदा सीएम धामी में बडी संभावना देखते हैं। अब जोशीमठ के मुद्दे पर सीएम धामी को अपरोक्ष रूप से विपक्ष के सबसे बड़े नेता हरीश रावत का साथ मिला है। दरअसल, बीते रोज पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेसी सीएम से मिलने गए थे। इस दौरान जोशीमठ को लेकर कांग्रेस नेताओं ने तमाम शंकाओ को सीएम के समक्ष रखा जिन्हें मुख्यमंत्री ने काफी गंभीरता पूर्वक सुना।

अब, आज पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर सीएम के रवैये की जमकर तारीफ की है।
पूर्व सीएम ने कहा कि “भविष्य के प्रतिद्वंद्वियों को सावधान रहना चाहिये। राज्य के मुख्यमंत्री जी बहुत अच्छे सुनने वाले व्यक्ति हैं। कल हम जोशीमठ आपदा पर ढेर सारे सुझाव देने के लिए गये। जिसमें कई सुझाव आलोचनात्मक भी थे, तीक्ष्ण सवाल भी थे, मगर मुख्यमंत्री जी ने पूरे धैर्य के साथ उनको सुना। अब कितना समाधान निकालेंगे, इस पर भविष्य की नजर रहनी चाहिए। देखते हैं प्रीफैबरीकेटेड घर कब बनने शुरू होते हैं, टेंट कॉलोनी यदि हो तो कब तक लगती है, सुरक्षित स्थानों का चयन कब होता है, मुआवजे की राशि लोगों को कब तक बता दी जाती है, कितना मुआवजा मिलेगा और किस तरीके से साधारण लोग जिनकी आजीविका जोशीमठ पर है उनके लिए क्या होता है! गाय के लिए क्या होता है, गाय के दूध पर जिनकी आर्थिकी है उनके लिए क्या होता है, तो बहुत सारी चीजें हैं, जिनकी हम सबको प्रतीक्षा रहेगी। मगर एक बात सत्य है कि सुना मुख्यमंत्री जी ने पूरे धैर्य से।”
विपक्ष के सबसे बड़े नेता के मुँह से निकली ये तारीफ भले उनकी पार्टी के नेताओं को असहज करे लेकिन मुख्यमंत्री धामी के लिए हरदा के मुँह से निकली यह तारीफ यह जाहिर कर रही है कि अनुभवी हरदा को सीएम धामी में रख लंबी रेस का घोड़ा नजर आता है। इससे पहले हाल ही में सीएम की देहरादून के एक स्कूल में बच्चे के जूते के फीते बांधने और रुद्रप्रयाग में जनता से मिलने की फोटो शेयर करके हरीश रावत सीएम धामी की अक्सर तारिफ करते रहे हैं।

भर्ती घोटाले पर हरीश रावत के बयान पर भटट ने किया पलटवार

भर्ती घोटाले मे पूर्व सीएम हरीश रावत के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा ने उन्हे आधा सच बोलने मे माहिर बताया। उन्होंने सीएम पर की गयी टिप्पणी को आपत्तिजनक करार देते हुए कहा कि धामी आज विकास के पर्याय हो गए है और पार्टी तथा जनता को उन पर फक्र है, लेकिन आरोप लगाने वालों को आत्म अवलोकन करने की जरूरत है कि वह दोनो स्थानों मे कहां खड़े है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रदेश मे सुचिता भ्रष्टाचार की बात करने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत के कार्यकाल मे भी या तो पूर्व मे हुए भृष्टाचार को परंपरा मान कर आगे बढ़ाया गया और कुछ नई शुरुआत की गयी। उनके कार्यकाल मे विधान सभा मे निकटस्थ रहे तत्कालीन विधान सभा अध्यक्ष के द्वारा की गयी नाते रिश्तेदारों की नियुक्ति पर भी वह आधा सच बोल पाए। उन्होंने यह कहकर पल्ला छुड़ा लिया कि उन्होंने तब तत्कालीन विस अध्यक्ष को इसके नतीजो को लेकर चेताया था, लेकिन फिर भृष्टाचार को समर्थन देते नजर आये। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल मे दर्जनों घपले सामने आये और वह भूल गए कि उन्होंने अपनी सरकार की गलतियों को स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी थी।
भट्ट ने कहा कि रावत भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा पर टिप्पणी कर रहे है, लेकिन धामी सरकार उन घपले घोटालों पर कार्यवाही कर रही है जो कि दबा दिये गए थे। कांग्रेस के कार्यकाल मे हुए ऐसे घपलों की लंबी फेरहिस्त है। उन्होंने पूछा कि पटवारी घोटाले में उन्होंने क्या कार्यवाही की। दरोगा भर्ती घोटाला, उद्यान, छात्रवृति, एन एच, 2016 की बीडीओ भर्ती और अन्य घोटालों में भी वह मौन क्यों रहे। अगर, कुछ मामलों मे दिखावे के लिए कुछ किया भी गया तो वह भी भाजपा के द्वारा विरोध प्रदर्शन और जन दबाव मे की गयी। जबकि धामी सरकार ने बिना काल खंड को देखते हैं नैतिक साहस दिखाया। हैरानी की बात है कि तब न नैतिक साहस था और न ही विपक्ष के विरोध प्रदर्शन का असर और सरकार पूरी तरह से भ्रष्टाचार मे लिप्त रही।
भ्रष्टाचार के दलदल मे डूबी कांग्रेस अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर ही आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे है। जबकि पूर्व मे हरीश रावत खुद धामी की शान मे कशीदे भी गढ़ते रहे। हरीश रावत अपने कार्यकाल मे हुए तमाम स्टिंग के बाद कंफ्यूज हो गए है और कभी भी पूरा सच नही बोल पाए। कभी राजनीति से विरक्ति, कभी विकास न कर पाने का मलाल और कभी अपने सहयोगियों से उपेक्षा की पीड़ा सुनाकर समय व्यतीत कर रहे है। राज्य यशस्वी मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व मे पार्टी के विकास के एजेंडे पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं और वह धाकड़ धामी की उपमा के साथ पूरी तरह न्याय कर रहे है। जनता और पार्टी को उन पर फक्र है, लेकिन उनके मामले मे यह बात कहीं से भी फिट नही बैठती है जो उन पर लगातार दुर्भावनावश टिप्पणी कर रहे है।

एक रावत का दूसरे रावत पर पलटवार, कहा-अपने कार्यकाल में की होती कार्रवाई तो आज धामी की नहीं रावतों की धूम होती

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग-यूकेएसएसएससी के गठन पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के सवाल उठाने पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने उनकी खिंचाई की। दो टूक सवाल किया कि क्यों गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल कार्रवाई नहीं की? यदि उसी समय कार्रवाई कर दी होती, तो आज धामी की धूम नहीं हो रही होती। बल्कि रावतों की धूम हो रही होती।
सोशल मीडिया पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने त्रिवेंद्र रावत पर कटाक्ष किया। कहा कि उन्हें समझ आते आते बहुत देर हो गई है। जब कांग्रेस सरकार ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती की जांच की। इसके बाद आपकी सरकार आ गई। आपके मंत्री ने विधानसभा के पटल पर स्वीकार किया था कि जांच में गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट शासन को मिल चुकी है। यदि उसी समय इतना गुस्सा दिखाया होता तो आज फिर धामी की धूम नहीं होती। कहा कि दरवाजे की चौखट पर सर टकराने से घर नहीं गिराए जाते। विधानसभा में भर्तियों में धांधलियां हुई तो विधानसभा भवन ही गिरा देंगे क्या?